चहचहाती गौरैया बड़ी मुश्किल से आती नजर

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कानपुर। गौरैया का चहचहाना मन को प्रफुल्लित करता है। हर सवेरे इनका कलरव नए जोश और ताजगी का प्रतीक है। आज जब मनुष्य कामयाबी की बुलंदियों पर चढ़ता जा रहा है। विकास की रफ्तार में नन्हीं सी चिड़िया कहीं गुम हो गई है। उसकी चहचहाट अब मुश्किल से सुनाई देती है। यह अभिव्यक्ति और विचार दयानंद गल्र्स काॅलेज की छात्राओं ने सुनाए। मौका था बुधवार को विश्व गौरैया दिवस के आयोजन का जिसमें छात्राओं के साथ ही फैकल्टी भी शामिल हुई।
जंतु विज्ञान विभाग की परास्नातक छात्राओं ने लघु नाटिका के द्वारा गौरैया तथा अन्य पक्षियों को बचाने का संदेश दिया। नाटिका के मंचन ने भावुक के साथ ही सोचने पर मजबूर किया। डॉ. शालिनी शुक्ला प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें पक्षियों से संबंधित प्रश्न पूछे गए। प्राचार्या प्रो. अर्चना वर्मा ने विजेता छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए। डॉ. सुनीता आर्या ने चिड़ियों के विलुप्त होने का कारण वन की कटाई, अत्याधिक कीटनाशकों का प्रयोग, मोबाइल टावर का अत्याधिकता इत्यादि बताई। गौरैया दिवस का उद्देश्य पशु पक्षियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना है। विभाग की इंचार्ज डॉ. अन्जली श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। डॉ. अमिता श्रीवास्तव, डॉ. इषिता पाण्डेय, डॉ. रचना सिंह, डॉ. कंचन मित्तल ने कार्यक्रम के आयोजन में योगदान दिया। महाविद्यालय की चीफ प्रॉक्टर अर्चना श्रीवास्तव, प्रो. वन्दना निगम, प्रो. मुकुलिका हितकारी, प्रो. सुचेता शुक्ला, इत्यादि उपस्थित रहे।

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