कभी पापा कहते थे मुश्किल खेल आज देश के लिए पदक जीता

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कानपुर। हरियाणा के हिसार जिले की 16 वर्षीय खिलाड़ी का नाम आज देश ही नहीं दुनिया भर के खेल प्रेमियों की जुबान पर है। उन्होंने उस खेल में उपलब्धि हासिल की है, जिसको कभी उनके पिता बेहद मुश्किल बताया करते थे। अब उनकी सफलता पर माता-पिता, रिश्तेदार और देशवासियों को गर्व है। हम बात कर रहे हैं पैरा एशियन गेम्स में कांस्य पदक विजेता कोकिला की, जिन्होंने 75 फीसद ब्लाइंडनेस (देखने में अक्षम) के बावजूद ब्लाइंड जूडो जे2 में बिलो 48 किलो भार वर्ग में चीनी ताइपे प्लेयर ली काई लिन को 10-0 से मात दी। अब वह पेरिस में होने वाले पैरा ओलिंपिक की तैयारी कर रहे हैं। कोकिला रविवार से छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में शुरू हुई नार्थ ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी जूडो चैंपियनशिप में विशिष्ठ अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कोकिला के मुताबिक उन्हें बचपन से जूडो सिखने का शौक था। ब्लाइंडनेस के चलते पिता कृष्ण कुमार कौशिक ने उनसे कहा कि यह काम मुश्किल है। बस उस दिन से ठाना और 2018 से जूडो के दांव पेंच सीखना शरू कर दिया। उनके मन में बस देश के लिए पदक जीतने का सपना था। उन्होंने दिन रात एक कर अभ्यास किया। इस कार्य में घरवालों से पूरा सहयोग मिला।

प्रधानमंत्री ने बढ़ाया हौसला
पैरा एशियन गेम्स में पदक जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोकिला का हौसला बढ़ाया, जिससे पिता का सीना गर्व से चैड़ा हो गया। उन्हें हरियाणा सरकार 51 लाख रुपये देने की घोषणा कर चुकी है।

कोच मुनव्वर राणा से ली ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश जूडो एसोसिएशन के महासचिव और कोकिला के कोच मुन्नवर अंजार ने बताया की कोकिला की देखने की क्षमता काफी कम है। उसके बाद भी जूडो में उनका कोई जोड़ नहीं है। मैट पर कोकिला की फुर्ती के सामने विपक्षी टिक नहीं पाता है। कोकिला इससे पूर्व कई नेशनल और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में मेडल जीत चुकी हैैं।

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